25-Oct-2011
१.मैं अपने सभी दोस्तों की खूब help करता हूँ. पर time पे वो मेरी help कभी नहीं करते उलटे मेरा मज़ाक उड़ा देते हैं. क्या मुझे उनकी help करनी छोड़ देनी चाहिए? और, मुझे क्या करना चाहिए.
प्रीतम पार्कर, पटना
नेकी कर दरिया में डाल – गीता में इसे निष्काम कर्म कहा गया है. हेल्प करते समय हमें भीतर से अच्छा लगता है. जो खुशी हमें कुछ हासिल कर के मिलती है उससे कहीं ज्यादा खुशी दूसरों की हेल्प करने से मिलती है. तो हेल्प करना बिलकुल छोड़ना नहीं चाहिए. अपने हेल्प के दायरे को दोस्तों तक लिमिटेड नहीं रखते हुए आप ऐसे लोगों की मदद ज्यादा करें जो वाकई में ज़रूरतमंद हों.
२. My mother always fears something and also in tension, how can I help my mom. Please advise me. Tanveer, Kanpur
मन जब फ्यूचर में ज्यादा रहता है तो डर और चिंता आती है. लविंग वातावरण से डर और इन्सिक्योरिटी की फीलिंग कम हो जाती है. उनको अपने पसंद की एक्टिविटी में बिज़ी रखें ताकि उनका मन अधिक से अधिक वर्तमान में रहे– जैसे वे कोई क्लास ज्वाइन कर सकती हैं, स्वयं छोटे बच्चों को पढ़ा सकती हैं, या और कोई सेवा का काम ले सकती हैं. प्राणायाम, योग, ध्यान और सुदर्शन क्रिया से पोसिटिव लाइफ़ फ़ोर्स बढ़ता है जिससे टेंशन और डर खत्म हो जाता है.
३.मैं ऑफिस में अक्सर देर तक काम करता हूँ, मेरे दोस्त मुझे workaholic कहतें हैं. मैं नहीं जानता कि मैं workaholic हूँ. क्या इससे मुझे नुकसान हो सकता है?
रवि, आगरा
बिना परिणाम की चिंता करे हुए अगर आप अपना हण्ड्रेड परसेंट देकर पूरे दिल से काम कर रहे हैं तो उसे कर्म योग कहा जाता है. बस आप अपने हार्ड वर्क को स्मार्ट वर्क में बदल दीजिए. गीता में कहा गया है "योगः कर्मसु कौशलं॥" – योग हमारे काम में कुशलता लाता है. एक गाड़ी को चलाने के लिए एक्सेलेरेटर और ब्रेक दोनों चाहिये. काम के साथ-साथ आपके जीवन के रिश्ते, आपकी होबीज़, आपकी स्पिरिचुअल बढ़त भी ज़रूरी है. हमें बैलेंस्ड होकर धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पर ध्यान देना होगा.
