Wednesday, October 26, 2011

11-Oct-2011


मुझे छोटे-छोटे काम भी पूछकर करने की आदत है. मैं घर में, ऑफिस में यहाँ तक कि travel करते वक्त अनजाने लोगों से भी advise लेने लगता हूँ. कई बार लगता है कि बिना advise लिए भी काम  हो सकता है. मेरी ये आदत क्या मेरे अंदर inconfidence को दिखाती है?
राजीव, पटना
हम सभी के अंदर एक अनोखी इंस्टिंक्ट है जो हमेशा हमें सही रस्ते चलने के लिए गाइड करती रहती है. जानवर तक अपना बचाव इसी इंस्टिंक्ट के आधार पर कर लेते हैं. आपने देखा होगा कि जब कभी भी हम कुछ गलत करते हैं तो उससे पहले हमारे अंदर एक आवाज़ आती है जो उसे न करने के लिए कहती है. गलत फैसले तभी होते हैं जब हम उसे अनसुना कर देते हैं. ज्यादा अनुभवी लोगों की advise लेना अच्छा है, पर सभी advise को सुनकर वही करिये जो आपकी अंदर की आवाज़ बोले. प्रयोग के लिए एक दिन आप मौन रहिये, ज़रूरत पड़ने पर ही बोलिए.

ऐसा नहीं कि मैं लोगों की परवाह नहीं करती लेकिन लेकिन छोटी-छोटी चीजों को लेकर केयर करना और दिखावे के लिए मीठी-मीठी बातें करना मेरी आदत नहीं है. लोग इससे बहुत नाराज रहतें हैं. क्या ये मेरा rude behavior है?
पल्लवी, वाराणसी
मन से, बोली से, और एक्शन से – हमें तीनों स्तरों पर परफेक्ट होना चाहिए. किसी एक में भी अगर कमी है तो वह कम्प्लीट नहीं है. अधिकतर लोग अपने को मन से केयरिंग मानते हैं. पर जब तक केयर को एक्शन से express नहीं करा जाये तो वह पर्याप्त नहीं है. और केवल मीठी बोली से केयर जताया जाये, और मन में कुछ और हो तो भी वह ठीक नहीं है. आप को ऐसे लोग ज्यादा पसंद होंगे जो अच्छी भावना रखते हों, मीठी बोली भी, और हेल्प भी करें. आप भी वैसा बनिए.    

मैं ऐसे लोगों कि बिलकुल हेल्प नहीं करना चाहता जो दूसरों की हेल्प नहीं करते. क्या मैं सही हूँ? आपकी क्या राय है?
संजय, जमशेदपुर
क्या आप किसी अपाहिज की हेल्प नहीं करना चाहेंगे? सच्ची हेल्प वही होती है जिसके बदले में कुछ भी पाने की अपेक्षा नहीं रखी जाए. मदद करने का जो भी मौक़ा मिले उसे उठा लेना चाहिए. हाँ कुछ लोगों को हाथ फैलाने की आदत होती है – ऐसों को हेल्प करने का तरीका अलग किया जा सकता है ताकि वे अपने पैरों पर खड़े हो सकें जैसे उनसे कोई काम करवाना.

0 Comments:

Post a Comment

Subscribe to Post Comments [Atom]

<< Home