Wednesday, October 26, 2011

20-Sep-2011


मुझे यूनिवर्सिटी में आये हुए २ महीने हो गए, मेरा कोई दोस्त नहीं है. मैं दूसरों से बहुत घुल मिल नहीं पाता हूँ. दूसरे मेरे पास आते हैं तो मैं बहुतconscious हो जाता हूँ. मुझे लगता है कि वो अपने फायदे के लिए आये हैं. अब मैं अकेलापन feel करता हूँ. मैं क्या करूँ?
राकेश वर्मा, पटना
अक्सर दोस्ती आपसी फायदे के लिए ही शुरू होती है. कोई सामान्य समस्या, सामान्य पसंद, सामान्य कार्यक्षेत्र, सामान्य लक्ष्य या लंबी जान-पहचान दो लोगों को दोस्त बना देती है. जब दोस्ताना स्वभाव से दोस्त बनते हैं जिसके पीछे कोई कारण न हो तो ऐसी दोस्ती लंबी चलती है. अपने अकेलेपन से निकलने का एक उपाय है कि आप दूसरों को खुशी खुशी फायदा देने के लिए तैयार हो जाइए. आप यदि किसी के लिए उपयोगी बन सके तो आप अपने को लकी मानिए.    

मैं पूजा-पाठ बहुत करता हूँ. एक दिन भी मिस कर देता हूँ तो लगता है कि कुछ भूल रहा हूँ. मेरे एक दोस्त ने मुझे समझाया कि  इतना ज्यादा पूजा पाठ ठीक नहीं है. मुझे भी लगता है मेरे पूजा पाठ से घर में लोगों को परेशानी होती है पर कोई कुछ कहता नहीं. क्या मुझे पूजा पाठ थोड़ी कम करनी चाहिए?                                                                                                                               तन्मय जैसवाल, बरेली
हमें अपने साधना के तरीके को choose  करने की पूरी आज़ादी है. आपकी बातों से ज़ाहिर है कि आप अपनी पूजा-पाठ को इंज्वॉय करते हैं  - तब आप बस अपने आत्मा या अपने गुरु की बात को मानिए और किसी दूसरे की राय लेने की ज़रूरत नहीं है. पूजा को बड़े प्रेम के साथ करिये – इस डर के साथ नहीं कि यदि आप पूजा कुछ कम कर देंगे तो कुछ बिगड़ जायेगा. ध्यान रखें कि आप की पूजा पाठ से औरों को कम से कम परेशानी हो – जैसे शोर कम करें, समय का ध्यान रखें और अपनी सभी जिम्मेदारियों को पूरी तरह से निभाएं.

मैं businessman हूँ और रोजाना busy रहता हूँ, न तो family को वक्त दे पाता हूँ और न ही खुद के लिए वक्त निकाल पाता हूँ. कभी सोचता हूँ किbusiness grow करेगा तो फॅमिली के लिए ही होगा, फिर लगता है कि फॅमिली के साथ एक लंबा ब्रेक लेना ही चाहिए. मैं confused हो गया हूँ किimportant क्या है.
पंकज तिवारी,  मेरठ
बैलेंस रखना ज़रूरी है. आपको फॅमिली, बिज़नस, हॉबीज़, और आध्यात्मिक विकास चारों पर ध्यान देना होगा तब ही आप संतुष्ट रहेंगे. किसी एक में भी ध्यान कम देने पर अंदर से बेचैनी महसूस होती है.

  
मैं सोचता बहुत हूँ. अक्सर लोग कहतें हैं कि मैं खोया खोया रहता हूँ. मैं भी realize करता हूँ कि काम के बीच अक्सर ही मेरा mind divert हो जाता हैं और मैं दूसरी बातों में खो जाता हूँ. रस्ते में चलते वक्त भी मैं सोचता रहता हूँ. इस आदत से छुटकारा कैसे मिलेगा.
प्रदीप शर्मा, गोरखपुर
हमारे मन भूतकाल या भविष्य के बीच में डोलता रहता है. जब मन भूतकाल में होता है तो ऐसी बातों को ज्यादा याद करता है जो गडबड़ हुईं और जब मन भविष्य में जाता है तो हमारे अंदर डर या चिंता आ जाती है. हमारे सबसे अधिक खुशी के पल वह रहे जिसमें मन वर्तमान क्षण में था. साँसों की एक विशेष प्रक्रिया है जिसे सुदर्शन क्रिया कहते हैं जिसे सीख कर मन के इस स्वभाव से छुटकारा मिल सकता है. 

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