Wednesday, October 26, 2011

23-Aug-2011


मेरे दोस्तों का कहना है कि मैं दूसरों की बातों से बहुत जल्दी impress हो जाता हूँ, कई बार मुझे भी यह realize होता है. मुझे कई बार इसका नुकसान भी उठाना पड़ता है. मुझे इससे कैसे बचना चाहिए?
अनूप पाण्डेय, बरेली
दूसरों के अंदर अच्छाई देखना तो पौसिटिव गुण है. बिना ट्रस्ट के हम इस संसार में एक इंच भी आगे नहीं बढ़ सकते. जीवन को सुखी बनाने के लिए ट्रस्ट रखना ज़रूरी होता है. हाँ दूसरों की बातों में हम बह न जाएँ - इसके लिए ज़रूरी है आत्म-विश्वास. आप को अपने आप से भी impress होना चाहिए. दूसरा हमारी इच्छाएं हमको कमज़ोर कर देती हैं जिससे हम औरों की बातों में फँस सकते हैं. हमें जो कुछ भी मिला है उससे यदि हम तृप्त हो जाएँ तो कोई भी आपको हिला नहीं सकता है.   

मैं अपना कोई भी काम सही से manage नहीं कर पाता जब वक्त निकल जाता है तो irritate हो जाता हूँ. रोज प्लान बनाता हूँ पर divert होकर इधर-उधर के कामों में उलझ जाता हूँ. यहाँ तक कि मैं अपना week-off भी planning के मुताबिक एन्जॉय नहीं कर पता. क्या ये concentration प्रॉब्लम है? हाँ, तो solution क्या है?
दिलीप बरनवाल, कानपुर
जब तक आपके अंदर उस काम को करने के लिए दिल से चाह नहीं जगेगी या काम नहीं होने का डर नहीं होगा तब तक आप ढीले पड़ सकते हैं. आपने जो प्लैन बनाया हो उसको लिख लें. अपने डेस्क पर प्लैंन को चिपका लीजिए या अपने मोबाइल में अलार्म भी सेट कर सकते हैं. किसी और के साथ अपने प्लैन को शेयर करने से उसके प्रति हम अधिक सिंसेयर हो जाते हैं – उस व्यक्ति को आप रिमाइंडर देने के लिए कह सकते हैं. रोज सवेरे कुछ देर ध्यान करिये.

मैं न चाहते भी चीजों पर react बहुत जल्दी करता हूँ. खुच लोग मुझे suggest करतें है कि मुझे reaction less होना चाहिए, पर कोई reaction lessकैसे हो सकता है. ये possible है?
रंदेप सिंह, पटना
Act करिये  - React नहीं. Reaction हम बिना होश के करते हैं जिससे हम गलत फैसले ले लेते हैं. हमें अपनी परिस्थिति को और लोगों को पहले स्वीकार करना पड़ेगा. स्वीकार करने के बाद फिर जब हम सोच समझ कर निर्णय लेते हैं तो वे अधिक प्रभावशाली होते हैं. स्वीकार के साथ यदि आप क्रोध का दिखावा भी करें तो भी ठीक है – जैसे किसी छोटे बच्चे को आप माचिस के साथ खेलने के लिए डाटते हैं.

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