09-Aug-2011
इमोशनल होना अच्छा है या बुरा? मैं फिल्म देखते वक्त या कोई बुक पढते वक्त अक्सर इमोशनल हो जाता हूँ. कई बार आँखों से पानी भी आ जाता है. क्या मुझे इस पर कंट्रोल करना चाहिए? अगर हाँ तो कैसे?
अर्जुन सिंह पटना
न ही हम इतना इमोशनल हो जाएँ कि कमज़ोर हो जाएँ और न ही इतने स्ट्रोंग रहे कि इनसेंसिटिव हो जाएँ. ज्ञान के पथ में इमोशनल नेचर हमारी ताकत बन सकता है – उससे ज्यादा इंट्यूशन, दया, प्रेम, धीरज, सहनशीलता, आत्म-विश्वास, गैर प्रतिक्रयाशील शांत स्वभाव आ सकता है. भावनाओं को कंट्रोल करने के लिए सुदर्शन क्रिया सबसे अच्छा उपाय है. अलग अलग इमोशन में हमारी साँसों की लय अलग-अलग हो जाती है. सुदर्शन क्रिया में इसका ठीक उलटा किया जाता है जिसमें अलग-अलग साँसों की लय के द्वारा अंदर की भावनाएँ बदल जाती हैं.
हम अपनी सेहत के लिए हेल्थ फ़ूड खाते हैं, डाईट चार्ट फौलो करते हैं. आत्मा की सेहत के लिए हमें क्या करना चाहिए? क्या इसके लिए भी प्लानिंग करी जा सकती है.
तरुण वर्मा जमशेदपुर
सोल भूखी है मेडिटेशन के लिए. उसी से उसको राहत मिलती है –कई निर्देशित ध्यान यूट्यूब में या उनकी सीडी बाज़ार में उपलब्ध हैं जिनके साथ आप ध्यान कर सकते हैं. प्रेम, सेवा, आनंद और उत्साह से आत्मा की सिचाई होती है.
जब मेरे साथ सब कुछ बुरा हो रहा है ऐसे में मैं पोसिटिव कैसे सोच सकता हूँ? १२थ के एक्साम में मेरे नंबर कम आये, मुझे अच्छे कॉलेज में अड्मिशन भी नहीं मिल पाया. लोग मुझसे ठीक से बात भी नहीं करते. मैं बिलकुल पोसिटिव नहीं हो पा रहा हूँ.
सुनील कुशवाहा
बीती बातों की गलतियों पर पछतावा न करते हुए, भविष्य का एक लक्ष्य रखते हुए अपने वर्तमान को अपना १००% अट्टेंशन दीजिए. यह समय है एक्शन लेने का. हो सकता है कि अच्छे कालेज में आपको दाखिला नहीं मिला पर अब जिस कालेज में है उसके आप सबसे अच्छे छात्र बन सकते हैं. कालेज में जिम्मेदारी उठाने का छोटे से छोटा मौक़ा लीजिए, जैसे आप किसी कल्चरल इवेंट को ओर्गानाइज़ कर सकते हैं. जितनी ज्यादा जिम्मेदारियां आप निभाएंगे उतनी ही ज्यादा आप की क्षमता बढ़ेगी और आप पौज़िटिव रह सकेंगे.

0 Comments:
Post a Comment
Subscribe to Post Comments [Atom]
<< Home