Wednesday, October 26, 2011

12-July-2011

Q:Spiritual गुरु अक्सर past और future से बाहर निकलकर present moment को enjoy करने को
कहते हैं लेकिन ये कैसे possible है कि मैं past experience को भूल जाऊं और future के बारे में
सोचना बंद कर दूँ ? मुझे नहीं लगता की ऐसा practically possible है. अगर possible है तो कैसे?
Roshan Mathur. Agra
A:Practically जब आप अपनी कोई पसंदीदा चीज़ कर रहे होते हैं तब उस समय आपका मन भटकता नहीं है present में ही रहता है. Past से सीख लीजिए, Future का लक्ष्य तय करिये, परन्तु present में जीवन को जियें. अगर आपके मन में ग्रहण करने की शक्ति है तो उसमें छोड़ने की शक्ति भी है. बीते कल के बुरे अनुभवों को और आने वाले कल की चिंता को छोड़ने के लिए सुदर्शन क्रिया बहुत उपयोगी है.

Q:मैं 12th कि student हूँ , मेरे classmates मुझे मिस- परेशान कहते हैं. मुझे भी लगता है कि मैं छोटी छोटी चीज़ों से जैसे pen खो जाना या किसी ने कुछ कह दिया तो परेशान हो जाते हूँ. मैं mentally cool रहना चाहती हूँ, क्या आप help कर सकते हैं या यह मेरा nature है जिसे बदला नहीं जा सकता?
A:परेशान रहना आपका स्वभाव नहीं बल्कि आदत है. और सभी आदतों को छोड़ा जा सकता है. अगले पांच दिनों के लिए आप मन में तय कर लीजिए कि आप किसी बात के लिए परेशान नहीं रहेंगी. फिर भी कोई
परेशानी आ जाए तो पांच मिनट के लिए आँखों को बंद कर के अपनी परेशानी को पूरी तरह महसूस करे, देखें
कि उससे आपके शरीर में, मन में, भावनाओं में क्या असर पड़ रहा है. याद करिये कि जिस आज के लिए
आप बीते कल में परेशान थीं वह तो अभी इतना कठिन नहीं है.

Q:मैं ambitious हूँ और इसीलिए successful हूँ. मैं एक के बाद एक नए target तय करता हूँ और उसे achieve भी करता हूँ, लेकिन एक famous proverb ‘संतोषम परम सुखं’ मेरे गले नहीं उतरती कि अगर कोई चीज़ों को लेकर संतोष करने लगे तो वह अपने life में क्या हासिल करेगा?
Ashish, Gorakhpur
A:हाँ यूथ को बिलकुल ambitious होना चाहिए, उससे कुछ करने की ड्राइव मिलती है. परन्तु यह ध्यान
देना होगा कि कहीं हम उस घोड़े की तरह तो जीवन भर तक भागते नहीं जा रहे हैं जिसके आगे गाजर लटकी हुई है. इच्छा आने से पहले जो आपके मन की स्थिति होती है इच्छा के पूरे होने पर वही स्थिति आपको वापस मिल जाती है. इसीलिये संतोष को धन कहा गया है वरना इसी चक्कर में फंसे रह जाते हैं. Ambition हमें present का आनंद लेने से रोकती है, वह हमारी बाकी priorities को भुला देती है, जिससे हम स्वार्थी बन सकते हैं व दूसरों के प्रति इनसेन्सिटिव. इसका एक हल है कि अपने ambition को और बड़ा बना लें– जैसे देश के लिए कुछ करना.

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