Wednesday, October 26, 2011

06-Sep-2011


प्रश्न : कई बार मुझे लगता है कि मैं गलत हूँ फिर भी न मैं गलती accept कर पाता हूँ और न ही sorry  कह पाता हूँ, उल्टा गुस्सा करने लगता हूँ, बाद में guilt भी feel करता हूँ. ऐसा मेरे साथ अक्सर होता है. मुझे लगता है कि मैं sorry कह पाता तो हल्का feel करता. कोई solution है?
-अमलेन्दु त्रिपाठी, रांची
उत्तर: आपके लिए relationship ज्यादा important है कि अपने आप को सही साबित करना. एक साधारण से Sorry शब्द से कड़वाहट, गुस्सा, नफरत और दूरियां मिट सकती हैं. गलती को सिर्फ एक होनी की तरह देखें जो अनजाने में होती है  – अगर गलती के साथ “तुम्हारी गलती” जोड़ा तो उससे गुस्सा आता है और अगर “मेरी गलती” जोड़ा तो उससे guilty feeling आती है. फिर भी उस गलती से जिन लोगों को चोट पहुँची हो उनके मन को संभालने का दायित्व आपका है.


प्रश्न : मैं 12th में पढ़ती हूँ और डॉक्टर बनना चाहती हूँ, मेरी preparation भी अच्छी हो रही है फिर भी अपने future को लेकर बहुत डरती रहती हूँ. कभी-कभी लगता है कि मैं कुछ भी नहीं कर पाऊँगी. वहीँ दूसरे जो मुझसे पढ़ने में भी weaहै वो मुझसे ज्यादा खुश रहते हैं. मैं  positive कैसे feelकरूँ? 
- अर्पिता श्रीवास्तव,
उत्तर: डर का उपाय प्रेम है. अपने subject से प्रेम करिये. विषय में रूचि रखने से हमारी knowledge बढ़ती है  - और अगर आपके concepts clearहैं तो आजीविका की चिंता नहीं करनी है क्योंकि वह अपनेआप ही आपको मिल जायेगी. अपने से दस साल सीनियरों के जीवन को आज देखिये - वे सभी settled होंगे – आप भी हो जायेंगी.   

प्रश्न : मैं PG कर रहा हूँ, और मेरी प्रॉब्लम ये है कि मैं न चाहते हुए भी बहुत ज्यादा बोलता हूँ. दूसरों को advise देने लगता हूँ. उस वक्त मुझे लगता है कि मैं बहुत ज्यादा बोल रहा हूँ, पर न जाने क्यों मैं अपने आप पर कण्ट्रोल नहीं कर पाता हूँ. मुझे क्या करना चाहिये?
-अजीत तिवारी, गोरखपुर
उत्तर: Observe ज्यादा करें, बातें कम इतनी सलाह नहीं दें कि दूसरा उसको हजम नहीं कर पाए.  देखें कि दूसरा व्यक्ति उनको ले भी रहा है कि नहीं. आप दूसरों से प्रश्न पूछिए – उनकी पसंद नापसंद को जानिये, उनकी प्रोब्लेम्स और उनके अलग-अलग विकल्प उन्हीं से पूछिए, और हरेक हल के फायदे-नुक्सान को उनसे समझ कर फिर अपनी सलाह दीजिए. इससे आपका संवाद बेहतर होगा. याद रखिये कि आप सलाह उनकी मदद के लिए दे रहे हैं और बदले में आप को कुछ भी नहीं चाहिए – उनका स्वीकार भी नहीं.

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