13-Sep-2011
मेरे दोस्तों का मानना है कि मैं खुशमिजाज nature का हूँ, मुझे भी लगता है कि मैं परेशान कम होता हूँ लेकिन बीते दिनों IAS pre में मैं सेलेक्ट नहीं हो पाया जबकि मुझे पूरी उम्मीद थी. मैं बहुत उदास रहने लगा हूँ, Study में भी मेरा मन नहीं लग रहा है. मैं क्या करूँ?
प्रीतम, अलाहाबाद
I have answered many questions related to failure in entrance exams/studies in the past, please choose questions with more diversified topics else won’t this column become repetitive?
जब हम खुश और relaxed रहते हैं तो अक्सर focus नहीं कर पाते हैं, और जब हमें concentrate करना होता है – जैसे exam से पहले तब हम टेंशन फ्री नहीं हो पाते. जब हम sports खेलते हैं तब हम फ़ोकस्ड और रिलैक्सड दोनों हो सकते हैं. आपको भी अपने कैरियर के लिए ऐसी ही मनोस्थिति बनानी होगी. आपके जैसे कई युवाओं को सुदर्शन क्रिया से भी बहुत लाभ मिला है. आपकी जितनी capacity है उसका पूरा इस्तेमाल करिये – कर्म पर हमारा पूरा अधिकार है, फल पर नहीं.
मैं सबको हंसाने और खुश करने की कोशिश करता रहता हूँ, लेकिन कई बार लोगों से ऐसा response मिलता है कि मैं अंदर से टूट जाता हूँ. जब मैं सबसे अच्छा behave करता हूँ तो लोग मुझसे बुरा behave क्यों करते हैं?
मयंक सोनी, पटना
वे बेचारे खुद स्ट्रेस्ड हैं – उन के प्रति दया रखिये. एक हँसमुख व्यक्ति को तो कोई अपमानित कर ही नहीं सकता – वह स्वभाव ही उसकी ढाल है. हँसना-हँसाना बहुत अच्छा गुण है जो लोगों को जोड़ता है और डर और चिंता को मिटाता है. हाँ मजाक की अति भी अच्छी नहीं लगती- उसे सही जगह और समय पर करना चाहिए. मजाक के साथ ज्ञान हो और लोगों का ख्याल भी रहे तब वह छिछला नहीं लगता है. यदि आप मुस्कुराते हुए अपनी सभी जिम्मेदारियों को भी पूरी तरह से निभा रहे हैं – तब आपके हँसी मजाक को लोग बेहतर ले पायेंगे.
मैं लाख कोशिश करूँ लेकिन दूसरों का मजाक बनाने से मैं खुद को रोक नहीं पाता. कई लोग मुझसे नाराज़ हो जाते है. मैं खुद को कण्ट्रोल कैसे करूँ?
राकेश सचान,कानपूर
शब्दों का उद्देश्य शान्ति बनाना है. आप यह जज कर लीजिए कि आपका मज़ाक कहीं अपमान तो नहीं है? अपमान रिश्ते तोडता है जबकि मज़ाक लोगों को जोड़ता है. मज़ाक से माहौल को हल्का बनाइये और साथ ही यदि आप caring और concerned फ़ील करेंगे और sensitivity रखेंगे तो लोग नाराज़ नहीं होंगे. आप साथ में अपना भी मज़ाक बनाया करिये.
जब मैं किसी से बेहतर होता हूँ तो बहुत अच्छा feel करता हूँ लेकिन ज्यों ही मेरी मुलाकात किसी genius से होती है मैं खुद को कमजोर समझने लगता हूँ और disturb हो जाता हूँ. मैं बैलेंस रहना चाहता हूँ, कोई solution?
विवेक, देहरादून
अपने को औरों से बेहतर समझना या तुच्छ समझना दोनों ही अहंकार के रूप हैं. इसका उपाय सभी के साथ अपनेपन की सहज भावना रखना है. माँ-बाप अपने बच्चे को मेडल पाता देख खुद गर्व महसूस करते हैं – उससे जलते नहीं. बगीचे का हर फूल perfect है – वैसे ही आप-हम सभी अपनी जगह perfect हैं. लता मंगेशकर जी की आवाज़ को सुनकर हम अपने को कमज़ोर नहीं समझते बल्कि ईश्वर द्वारा मिली उनकी प्रतिभा को हम इंज्वॉय करते हैं. दूसरों को सराहना एक दिव्य गुण है.

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